एक आदमी सागर के किनारे टहल रहा था।
एका एक उसकी नजर चांदी की एक छड़ी पर पड़ी,
जो बहती- बहती किनारे आ लगी थी।
वह खुश हुआ और झटपट छड़ी उठा ली।
अब वह छड़ी ले कर टहलने लगा।
धूप चढ़ी तो उसका मन सागर में नहाने का हुआ।
एका एक उसकी नजर चांदी की एक छड़ी पर पड़ी,
जो बहती- बहती किनारे आ लगी थी।
वह खुश हुआ और झटपट छड़ी उठा ली।
अब वह छड़ी ले कर टहलने लगा।
धूप चढ़ी तो उसका मन सागर में नहाने का हुआ।